कृतिका अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड
हरिद्वार : सुखदेव आश्रम में 30 सितंबर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर व्यास पीठ पर आसीन परम श्रद्धेय मदन मोहन जी महाराज के मुखारविंद से श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबकर कथा का श्रवण किया।
कथा व्यास ने राजा परीक्षित के जन्म, शुकदेव जी के आगमन तथा भीष्म पितामह की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भावपूर्ण स्तुति के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया।
कथा में बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित की ब्रह्मास्त्र से रक्षा की थी। यही बालक आगे चलकर धर्मपरायण राजा परीक्षित बने। इसके साथ ही बाणों की शय्या पर विराजमान भीष्म पितामह द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति और उनके प्रति अटूट भक्ति का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया।
कथा के दौरान शुकदेव जी के दिव्य आगमन और राजा परीक्षित द्वारा उनसे जीवन के अंतिम समय में परम कल्याण का मार्ग पूछने का प्रसंग भी श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक सुना। कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत का श्रवण मनुष्य को भगवान के नाम, गुण और लीलाओं से जोड़कर जीवन को भक्ति एवं सद्मार्ग की ओर ले जाता है। प्रसंगों के दौरान आश्रम का वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा का श्रवण करते रहे।