गायत्री परिवार द्वारा आयोजित होने वाले शताब्दी समारोह से पूर्व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज के साधकों ने किया रक्तदान 

 

कृतिका (हरिद्वार) उत्तराखंड

हरिद्वार / गायत्री परिवार द्वारा आयोजित होने वाले शताब्दी समारोह से पूर्व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज के साधकों ने 325 युनिट रक्तदान किया। यह रक्त जरूरतमंदों हेतु सुरक्षित रखा गया है। रक्तदान शिविर देसंविवि एवं माँ गंगे ब्लड बैंक के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में विवि के छात्र-छात्राओं और शांतिकुंज के साधकों ने अभूतपूर्व उत्साह का प्रदर्शन किया, जिससे रक्तदान-जीवनदान का पुनीत संदेश सार्थक हुआ।

विवि के कुलसचिव श्री बलदाऊ देवांगन ने बताया कि एनसीसी दिवस के मौके पर आयोजित रक्तदान शिविर का आयोजन देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ चिन्मय पण्ड्या जी की प्रेरणा से की गयी। इसमें कुल 325 युनिट ब्लक एकत्रित किये गये। जिसे जरूरतमंदों हेतु सुरक्षित रखा गया है।

विवि हमेशा युवाओं को सशक्त राष्ट्र निर्माण और मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करता रहा है। शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री योगेन्द्र गिरि ने बताया कि यह रक्तदान युग निर्माण योजना के तहत हम बदलेंगे-युग बदलेगा के संकल्प को सिद्ध करने वाला एक महायज्ञ समान है। विवि के अनेक विद्यार्थियों ने प्रतिकुलपति डॉ पण्ड्या जी के विचारों से प्रेरित होकर पहली बार रक्तदान करने पहुंचे थे। रक्तदान शिविर के दौरान 500 से अधिक लोगों ने अपना पंजीयन कराया था। एनसीसी अधिकारी एवं शिविर समन्वयक लेफ्टिनेंट डॉ पवन कुमार राजोरिया व डॉ उमाकांत इंदौलिया के नेतृत्व ने विद्यार्थियों को अनुशासन और सेवा-भाव हेतु प्रेरित किया।

शांतिकुंज व विवि प्रशासन का मानना है कि मनुष्य में देवत्व का उदय तभी संभव है जब वह दूसरों के लिए जीता है। यह सफल रक्तदान शिविर इसी भावना को अभिव्यक्त करता है कि विवि के युवा माँ गंगे की पवित्र धारा के समीप रहते हुए, स्वार्थ रहित सेवा के माध्यम से सामाजिक उत्थान में अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं।

शिवानी, वंशिका, बालाजी, प्रज्ञा, ज्ञान प्रकाश, विष्णु थारू, माधवी, अमृता, हिमानी, मुस्कान आदि ने बताया कि हम लोग पूर्व में रक्तदान करने से कमजोरी आदि हो जाने के भय से भयभीत थे, लेकिन प्रतिकुलपति जी की प्रेरणा एवं प्रोत्साहन ने हम लोगों का हौंसला बढ़ाया और पहली बार रक्तदान किया है। बहुत खुशी हो रही है कि हमारा रक्त जरूरतमंदों के काम आयेगा। हम लोग भविष्य में भी रक्तदान करते रहेंगे।

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